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उर्वशी

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: उर्वशी

अप्सराऋग्वेदचंद्रवंश

उर्वशी स्वर्ग की सर्वश्रेष्ठ अप्सराओं में मानी जाती हैं।

पुराणों में उन्हें विष्णु/नारायण की जंघा (ऊरु) से उत्पन्न बताया गया है; वे स्वर्ग की सभाओं में नृत्य-गान करने वाली अप्सरा हैं।

ऋग्वेद (10.95) में उर्वशी और चंद्रवंशी राजा पुरूरवा का प्रसिद्ध संवाद है; कथा में उर्वशी कुछ शर्तों पर पुरूरवा के साथ रहीं और फिर स्वर्ग लौट गईं। कालिदास के 'विक्रमोर्वशीय' में यह प्रेमाख्यान विस्तृत है। उनके और पुरूरवा के पुत्र आयु हुए, जिनसे चंद्रवंश आगे बढ़ा; उर्वशी वैदिक साहित्य तथा काव्य परंपरा दोनों में प्रतिष्ठित हैं।

नाते-रिश्ते

  • प्रिय: पुरूरवा
  • पुत्र: आयु

प्रसिद्ध कथन

पुरूरवा और उर्वशी का संवाद (ऋग्वेद 10.95): पुरूरवा प्रार्थना करते हैं कि वे ठहरें; उर्वशी कहती हैं कि वे जा रही हैं और उनके वचन स्थिर नहीं हैं। (भावानुवाद)

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पुरूरवा-उर्वशीमेनकारंभातिलोत्तमा

स्रोत: ऋग्वेद / श्रीमद्भागवत पुराण