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तिलोत्तमा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: तिलोत्तमा

अप्सरामहाभारत

तिलोत्तमा स्वर्ग की अद्वितीय सुंदरी अप्सरा मानी जाती हैं।

महाभारत (आदि पर्व) के अनुसार ब्रह्मा के आदेश से दिव्य शिल्पी विश्वकर्मा ने तीनों लोकों के सर्वोत्तम अंगों से उन्हें रचा; 'तिल' (सूक्ष्म अंश) और 'उत्तम' से उनका नाम तिलोत्तमा पड़ा।

असुर भाई सुंद और उपसुंद ने तपस्या से अजेयता प्राप्त कर सृष्टि में उत्पात मचाया; तिलोत्तमा के रूप पर मोहित होकर दोनों भाई आपस में लड़कर मर गए। इस कथा से ब्रह्मा ने उन्हें तीनों लोकों में स्वतंत्र विचरण का वर दिया; नारद ने यह कथा पांडवों को सुनाई, जिसमें द्रौपदी के कारण कलह की चेतावनी थी।

नाते-रिश्ते

  • रचयिता: विश्वकर्मा
  • आदेशदाता: ब्रह्मा

प्रसिद्ध कथन

हे प्रभो! मुझे किस कार्य के लिए बनाया गया है? (महाभारत – आदि पर्व – भावानुवाद)

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ब्रह्माउर्वशीरंभामेनका

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व