त्रिशिरा
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: त्रिशिर, त्रिशिरस
त्रिशिरा तीन मुखों वाला एक राक्षस था। वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में वह खर की सेना का सेनापति बताया गया है।
उसका संबंध राक्षस-वंश से था। अरण्यकांड में खर-दूषण के साथ त्रिशिरा भी राम से युद्ध करने आया और उसने राम के ललाट पर तीन बाण मारे। कुछ परंपराओं में उसे रावण और धन्यमालिनी का पुत्र बताया जाता है।
क्रुद्ध होकर राम ने त्रिशिरा की छाती में चौदह बाण मारे और उसके तीनों मस्तक काट गिराए, जिससे उसका वध हुआ। रामचरितमानस में भी खर, दूषण और त्रिशिरा का वध वर्णित है। कुछ उत्तरवर्ती कथाओं में रावण-पुत्र त्रिशिरा को लंका युद्ध में हनुमान द्वारा मारा जाना बताया गया है।
नाते-रिश्ते
- सेनापति: खर
- सहयोगी: दूषण
- वधकर्ता: राम
प्रसिद्ध कथन
इस युद्ध में या तो मैं इनकी मृत्यु बनूँगा, या ये मेरी मृत्यु का कारण होंगे। (भावानुवाद)
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अरण्यकाण्ड