शरभंग
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: शरभंग ऋषि, शरभंग मुनि
शरभंग (शरभंग ऋषि) वनवास-काल में राम के दर्शन पाने वाले एक महर्षि थे। वाल्मीकि रामायण के अरण्यकांड में उनका प्रसंग आता है।
वे घोर तपस्वी और सिद्ध महर्षि थे। उनका आश्रम दंडक वन के मार्ग में था।
जब राम, लक्ष्मण और सीता वन में आगे बढ़ रहे थे, तब उन्होंने शरभंग के दर्शन किए। शरभंग ने राम को अपना अतिथि बनाया और कहा कि उनका जीवन सफल हो गया। राम-दर्शन के पश्चात उन्होंने अपना शरीर त्यागकर ब्रह्मलोक को प्राप्त किया। इस प्रकार शरभंग राम-दर्शन की महिमा के प्रतीक हैं।
नाते-रिश्ते
- संबंध: राम के दर्शन से सिद्धि
- समकालीन: सुतीक्ष्ण
- आश्रम: दंडक वन
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अरण्यकाण्ड