शंबूक
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: शम्बूक
शंबूक (शम्बूक) रामायण के उत्तरकांड का एक तपस्वी है। यह प्रसंग वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में मिलता है और इसे बाद में जोड़ा गया माना जाता है।
कथा के अनुसार शंबूक एक शूद्र था, जो सदेह देवलोक जाने की इच्छा से घोर तपस्या कर रहा था। उसी समय एक ब्राह्मण-पुत्र की असमय मृत्यु हो गई।
राम को बताया गया कि इस असमय मृत्यु का कारण एक शूद्र की तपस्या है। राम ने शंबूक को ढूँढकर उसका वध कर दिया, जिसके बाद ब्राह्मण-पुत्र पुनः जीवित हो गया। यह प्रसंग सदियों से चर्चा और पुनर्व्याख्या का विषय रहा है। कुछ परंपराओं में शंबूक की कथा भिन्न रूप में भी मिलती है।
नाते-रिश्ते
- जाति: शूद्र तपस्वी
- वधकर्ता: राम
प्रसिद्ध कथन
मैं शूद्र योनि में जन्मा हूँ और सदेह देवत्व पाने की इच्छा से घोर तप कर रहा हूँ; मुझे शूद्र शंबूक जानो। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – उत्तरकाण्ड