जयंत
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: जयन्त
जयंत देवराज इंद्र का पुत्र था। रामचरितमानस और रामायण-परंपरा में उसका प्रसंग वनवास-काल में आता है।
कथा के अनुसार एक बार राम चित्रकूट में सीता के साथ विश्राम कर रहे थे। तब इंद्र-पुत्र जयंत ने अहंकारवश कौए का रूप धारण किया।
उस कौए ने सीता के चरणों में चोंच मारी, जिससे रक्त बहने लगा। राम ने क्रुद्ध होकर ब्रह्मास्त्र (या अभिमंत्रित तिनका) छोड़ा, जो जयंत का पीछा करने लगा। किसी ने उसे शरण न दी; अंत में नारद की सलाह पर वह राम की शरण में आया। राम ने उसकी एक आँख फोड़कर उसे छोड़ दिया। इस प्रकार जयंत की कथा अहंकार के दंड और राम की करुणा की कथा है।
नाते-रिश्ते
- पिता: इंद्र
- माता: शची
- दंडदाता: राम
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अरण्यकाण्ड; रामचरितमानस – अरण्यकाण्ड