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शकुनि

महाभारत

अन्य नाम: सौबल, गांधारराज, मातुल, दुर्योधनमामा

गांधारद्यूतपासाषड्यंत्रकौरव

शकुनि गांधार नरेश सुबल के पुत्र और गांधारी के भाई थे, इसीलिए कौरवों के मामा कहलाए। परंपरा के अनुसार उनके पिता ने उनके भाइयों के साथ उनका अपमान किया था और यदुवंशियों ने उनके बंधुओं को बंदी बनाया, जिससे उनके मन में प्रतिशोध की भावना बलवती हुई। वे पासे के खेल में अद्वितीय कुशल थे।

उन्होंने लाक्षागृह का षड्यंत्र रचा और दुर्योधन को उकसाकर कपट-द्यूत कराया, जिसमें युधिष्ठिर सब कुछ हार गए। द्रौपदी के चीरहरण में भी उनकी भूमिका रही। शकुनि की कुटिल बुद्धि के कारण ही महाभारत युद्ध अनिवार्य हो गया। कुरुक्षेत्र में उन्होंने कौरव-पक्ष से युद्ध किया और सहदेव द्वारा उनका वध हुआ। वे महाभारत के सबसे कुटिल और षड्यंत्रकारी पात्रों में गिने जाते हैं।

नाते-रिश्ते

  • पिता: सुबल (गांधारराज)
  • बहन: गांधारी
  • भांजे: दुर्योधन आदि
  • पुत्र: उलूक

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

पूर्वजन्म में द्वापर (युग-पुरुष) थे; द्यूत-कपट हेतु जन्मे।

प्रसिद्ध कथन

द्यूत के लिए उकसाते हुए (भावानुवाद) — “पासा मेरे वश में है; भाग्य हमारा साथ देगा और पांडव सब कुछ हार जाएँगे।”
दुर्योधन को परामर्श (भावानुवाद) — “छल से जो प्राप्त होता है वह भी बल से जीते धन के समान ही होता है।”

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दुर्योधनगांधारीद्रौपदीयुधिष्ठिरहस्तिनापुरदुःशासन

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व; सभा पर्व