संध्या
स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ
अन्य नाम: संध्या
संध्या शिव पुराण की नारी हैं, जो ब्रह्मा की मानस (संकल्प से उत्पन्न) पुत्री थीं और पितरों (पितृगण) की माता कही जाती हैं।
उनका जन्म ब्रह्मा के गहन ध्यान के समय हुआ, इसीलिए वे 'संध्या' कहलाईं।
कथा के अनुसार कामदेव के प्रभाव से ब्रह्मा तथा अन्य ऋषियों के मन में उनके प्रति मोह उत्पन्न हुआ; इससे दुखी होकर संध्या ने चंद्रभागा पर्वत पर जाकर शिव की घोर तपस्या की। शिव की कृपा से उन्हें वर मिला और उन्होंने अपना शरीर त्यागकर मेधातिथि की पुत्री अरुंधती के रूप में जन्म लिया, जो आगे वसिष्ठ की पत्नी बनीं।
नाते-रिश्ते
- पिता: ब्रह्मा
- पुनर्जन्म रूप: अरुंधती
प्रसिद्ध कथन
अब कोई भी प्राणी जन्म लेते ही कामुक न हो। (शिव पुराण – भावानुवाद)
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स्रोत: शिव पुराण