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पुलोमा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: पुलोमा

पुराणभृगुच्यवन

पुलोमा पुराणों की नारी हैं, जो महर्षि भृगु की पत्नी और च्यवन ऋषि की माता थीं।

वे असुर पुलोमन की संबंधी थीं; कहा जाता है कि पुलोमन ने पहले उन्हें वर के रूप में चुना था, परंतु उनके पिता ने उनका विवाह वैदिक विधि से भृगु के साथ कर दिया।

महाभारत (आदि पर्व, पौलोम पर्व) के अनुसार भृगु की अनुपस्थिति में पुलोमन नामक राक्षस वराह का रूप धरकर पुलोमा को उठा ले गया; गर्भ में स्थित शिशु के तेज से वह भस्म हो गया और शिशु च्यवन के रूप में जन्मा। इस घटना से भृगु ने अग्नि को शाप दिया; इस प्रकार पुलोमा की कथा भृगु-वंश तथा च्यवन की उत्पत्ति से जुड़ी है।

नाते-रिश्ते

  • पति: भृगु
  • पुत्र: च्यवन

प्रसिद्ध कथन

हे स्वामी! मुझे उस राक्षस को अग्नि ने ही पहचान कराया था। (महाभारत – आदि पर्व – भावानुवाद)

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शची

स्रोत: महाभारत – आदि पर्व