शास्त्रज्ञशास्त्रों के ग्रंथ, पात्र, कथाएँ, स्थान और शब्द — एक जगह

मयासुर (रावण का ससुर/मायावी)

रामायण एवं रामचरितमानस

अन्य नाम: मय, मय दानव, मयासुर

रामायणदानवशिल्पीमंदोदरी-पिता

मयासुर (मय) दानवों का राजा और प्रसिद्ध शिल्पी था; उसे कश्यप और दनु की संतान माना जाता है। वह वास्तु-शिल्प का आचार्य था; दक्षिण भारत की वास्तु-परंपरा का प्रसिद्ध ग्रंथ 'मयमतम्' उसी से जोड़ा जाता है।

वाल्मीकि रामायण (युद्धकाण्ड) के अनुसार मय ने रावण के भय से तथा उसकी मैत्री की कामना से अपनी पुत्री मंदोदरी रावण को दी; इस प्रकार वह रावण का श्वसुर बना।

उत्तरकाण्ड के अनुसार मय का विवाह अप्सरा हेमा से हुआ; उनके पुत्र मायावी और दुंदुभि तथा पुत्री मंदोदरी थी। मायावी और दुंदुभि का वध वानरराज वाली ने किया। कुछ परंपराओं में मय की दूसरी पुत्री धन्यमालिनी (दम्यमालिनी) का विवाह भी रावण से हुआ बताया जाता है।

ध्यान रहे कि यहाँ वर्णित मय वही नहीं है जिसने महाभारत में पांडवों के लिए 'मयसभा' बनाई थी; दोनों प्रसंग अलग-अलग हैं।

नाते-रिश्ते

  • पुत्री: मंदोदरी
  • दामाद: रावण
  • पुत्र: मायावी
  • पुत्र: दुंदुभि

प्रसिद्ध कथन

मय ने रावण से कहा — "हे राक्षसश्रेष्ठ, हेमा से उत्पन्न मेरी यह पुत्री मंदोदरी तुम पत्नी रूप में स्वीकार करो।" (भावानुवाद)

संबंधित

रावणमंदोदरीवालीलंका

स्रोत: वाल्मीकि रामायण – युद्धकाण्ड / उत्तरकाण्ड