मारीच
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: मारीच
मारीच राक्षस सुंद और ताड़का का पुत्र था। बाल्यकाल में राम ने उसे बाण से मारकर समुद्र-पार फेंक दिया था, तब उसने राम से बैर न करने का निश्चय किया था।
सीता-हरण के समय रावण उसकी सहायता माँगने आया; मारीच ने उसे राम से बैर न करने की दृढ़ सलाह दी, परंतु रावण ने बलपूर्वक उसे सहयोग के लिए विवश किया।
तब उसने रावण के कहने पर स्वर्ण-मृग का रूप धरा; राम उसके पीछे गए और मारने पर उसने राम के स्वर में 'हा लक्ष्मण! हा सीता!' पुकारा, जिससे लक्ष्मण को भ्रम हुआ और सीता अकेली रह गईं।
नाते-रिश्ते
- पिता: सुंद
- माता: ताड़का
प्रसिद्ध कथन
रावण से: "हे रावण, राम से बैर तुम्हारे विनाश का कारण बनेगा; सीता का हरण कभी न करो।" (भावानुवाद)
मृत्यु के समय राम-स्वर में: "हा लक्ष्मण! हा सीता!" (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अरण्यकाण्ड; रामचरितमानस – अरण्यकाण्ड