मनुस्मृति 2.6
रोज़ का श्लोक
अन्य नाम: वेदोऽखिलो धर्ममूलम्
अर्थ — सम्पूर्ण वेद धर्म का मूल है; उसके जानने वालों की स्मृति और शील भी; साधुओं का आचार और आत्मा की तुष्टि भी (धर्म का मूल है)।
यह मनुस्मृति का प्रसिद्ध श्लोक धर्म के स्रोत बताता है — वेद, स्मृति, सदाचार और आत्म-संतोष। यह हिन्दू धर्मशास्त्र की मूलभूत मान्यता है।
श्लोक
वेदोऽखिलो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्।
आचारश्चैव साधूनामात्मनस्तुष्टिरेव च॥
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स्रोत: मनुस्मृति