भगवद्गीता 2.23
रोज़ का श्लोक
अर्थ — इस आत्मा को शस्त्र काट नहीं सकते, अग्नि जला नहीं सकती, जल गीला नहीं कर सकता और वायु सुखा नहीं सकती।
चारों महाभूतों की सीमा बताकर आत्मा की अभेद्यता सिद्ध की गई है। यह श्लोक भय और मृत्यु के प्रति निर्भयता का आधार है।
श्लोक
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः॥
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स्रोत: भगवद्गीता