अपाला
स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ
अन्य नाम: अपाला, अपाला आत्रेयी
अपाला वैदिक काल की ऋषिका थीं और ऋग्वेद के आठवें मंडल के 91वें सूक्त की द्रष्टा मानी जाती हैं।
वे महर्षि अत्रि की पुत्री (आत्रेयी) थीं।
कथा के अनुसार अपाला को त्वचा-रोग था, जिसके कारण उनके पति ने उन्हें त्याग दिया; वे पिता के घर रहकर इंद्र की तपस्या करने लगीं। उनकी स्तुति से प्रसन्न होकर इंद्र ने उन्हें रोगमुक्त किया और उनके पिता के मुंडित मस्तक पर केश उगा दिए; ऋग्वेद में यह प्रार्थना-सूक्त सुरक्षित है।
नाते-रिश्ते
- पिता: अत्रि
- कुल: आत्रेय
प्रसिद्ध कथन
हे इंद्र! हमारे खेत को उपजाऊ बनाओ, मेरे पिता के मस्तक पर केश उगाओ और मेरे शरीर को रोगमुक्त करो। (ऋग्वेद 8.91 – भावानुवाद)
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स्रोत: ऋग्वेद