आत्मबोध
ग्रंथ
अन्य नाम: आत्मबोधः
रचयिता / कर्ता: आदि शंकराचार्य
आत्मबोध अद्वैत वेदांत का संक्षिप्त ग्रंथ है, जिसमें आत्मा के वास्तविक स्वरूप का ज्ञान सरल श्लोकों में प्रस्तुत किया गया है।
इसके रचयिता परंपरा से आदि शंकराचार्य माने जाते हैं। ग्रंथ में लगभग अड़सठ श्लोक माने जाते हैं और यह प्रारंभिक अध्ययन के लिए उपयुक्त है।
विषय आत्मा-अनात्मा का विवेक और मोक्ष का साधन है। आत्मबोध वेदांत के विद्यार्थियों के लिए आदर्श प्रवेश-ग्रंथ माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
तपोभिः क्षीणपापानां शान्तानां वीतरागिणाम्। मुमुक्षूणामपेक्ष्योऽयमात्मबोधो विधीयते॥ (आत्मबोध, प्रथम श्लोक)
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स्रोत: आत्मबोध (शंकराचार्य)