दृग्दृश्यविवेक
ग्रंथ
अन्य नाम: दृग्दृश्यविवेकः
रचयिता / कर्ता: आदि शंकराचार्य
दृग्दृश्यविवेक अद्वैत वेदांत का ग्रंथ है, जिसमें द्रष्टा (दृग्) और दृश्य के भेद को समझाकर आत्मा का निरूपण किया गया है।
इसके रचयिता परंपरा से आदि शंकराचार्य माने जाते हैं। ग्रंथ में अनेक श्लोक हैं जिनमें दृश्य-पदार्थों के अनित्य होने का विवेचन है।
विषय साक्षी-चैतन्य और माया का स्वरूप है। दृग्दृश्यविवेक आत्म-विचार की गहरी साधना के लिए महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है।
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स्रोत: दृग्दृश्यविवेक (शंकराचार्य)