यात्रा विधि
तीर्थ यात्राएँ
अन्य नाम: यात्रा विधान, तीर्थ यात्रा विधि
यात्रा विधि तीर्थयात्रा से पूर्व संकल्प लेने, नियम पालन करने और यात्रा के दौरान शुद्ध आचरण रखने की शास्त्रीय विधि है। इसमें गुरु या पुरोहित से संकल्प, इष्ट-देव का स्मरण और व्रत सम्मिलित हैं।
परम्परा के अनुसार यात्री को ब्रह्मचर्य, सत्य, अहिंसा और संतोष का पालन करना चाहिए, तथा तीर्थ में स्नान, दान, जप और देव-दर्शन करने चाहिए। प्रत्येक तीर्थ की अपनी विशेष पूजा-विधि भी होती है।
धर्मशास्त्र-ग्रंथों और पुराणों में तीर्थयात्रा की विधि और फल का वर्णन मिलता है। माना जाता है कि विधिपूर्वक की गई यात्रा ही पूर्ण फल देती है, अन्यथा वह केवल भ्रमण बन जाती है।
संबंधित
स्रोत: धर्मशास्त्र / पुराण-परंपरा