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उषा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: उषा, उषस्

वैदिक देवीऋग्वेदप्रभात

उषा (उषस्) वैदिक काल की प्रभात (भोर) की देवी हैं, जो ऋग्वेद के अनेक सूक्तों में स्तुता हैं।

वैदिक मान्यता में वे द्यौस् (आकाश) की पुत्री और रात्रि (रात) की बहन हैं; सूर्य की सहचरी हैं।

उषा प्रतिदिन पूर्व दिशा से आकर अंधकार दूर करती हैं, सोते हुए प्राणियों को जगाती हैं और यज्ञ तथा कर्म के लिए प्रेरित करती हैं; उनका रथ अरुण घोड़ों द्वारा खींचा जाता है। ऋग्वेद में उषा को समर्पित लगभग बीस सूक्त हैं, जो वैदिक ऋषियों की भक्ति और काव्य-प्रतिभा के उत्कृष्ट उदाहरण हैं; वे अमरत्व की भी प्रतीक हैं।

नाते-रिश्ते

  • पिता: द्यौस्
  • बहन: रात्रि
  • सहचर: सूर्य

प्रसिद्ध कथन

उषा प्रतिदिन प्रकाश लेकर आती हैं और सोते हुए प्राणियों को जीवन तथा कर्म के लिए जगाती हैं। (ऋग्वेद – भावानुवाद)

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अदितिसंध्याउर्वशी

स्रोत: ऋग्वेद