श्रवण कुमार
रामायण एवं रामचरितमानस
अन्य नाम: श्रवण कुमार
श्रवण कुमार अपने वृद्ध और अंधे माता-पिता की सेवा में तत्पर थे। वे माता-पिता को कावड़ में बैठाकर तीर्थयात्रा पर ले जाते थे।
अयोध्यापति दशरथ शिकार खेलते समय जल में हिलती आवाज़ को हाथी समझकर बाण चलाया; वह बाण श्रवण को लगा और उनकी मृत्यु हो गई।
श्रवण ने मरते समय दशरथ को अपने अंधे माता-पिता की सेवा का भार सौंपा। अंत में दशरथ पर पुत्र-वियोग का शाप पड़ा। श्रवण मातृ-पितृ-सेवा के सर्वोच्च प्रतीक माने जाते हैं।
नाते-रिश्ते
- माता-पिता: वृद्ध अंधे दंपती
- वधकर्ता (अज्ञानवश): दशरथ
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स्रोत: वाल्मीकि रामायण – अयोध्याकांड