संगच्छध्वं सूक्त (ऋग्वेद 10.191.2)
रोज़ का श्लोक
अन्य नाम: सं गच्छध्वं
अर्थ — साथ चलो, साथ बोलो और तुम्हारे मन एक होकर जानें; जैसे पूर्वज देवता एक भाव से जानकर अपने भाग की उपासना करते थे।
यह ऐक्य और सामूहिकता का प्रसिद्ध वैदिक मंत्र है। यह समाज में एकता, सहयोग और मन की एकरूपता की प्रेरणा देता है।
श्लोक
सं गच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते॥
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स्रोत: ऋग्वेद