मेरु पर्वत
नदियाँ एवं पर्वत
अन्य नाम: सुमेरु, मेरु
पुराणों में मेरु को जंबूद्वीप के मध्य में स्थित स्वर्णमय पर्वतराज कहा गया है। इसे सुमेरु भी कहते हैं।
मेरु के चारों ओर सूर्य, चंद्र और ग्रहों का भ्रमण माना जाता है; इसके चारों ओर देवताओं के उद्यान बताए गए हैं।
विष्णु पुराण और सूर्य सिद्धांत में मेरु का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसे पृथ्वी का केंद्र और देवताओं का निवास माना गया। कैलास और मेरु को कभी एक ही माना जाता है।
प्रसिद्ध कथन
पुराणों में मेरु को जंबूद्वीप के मध्य का स्वर्णमय पर्वतराज कहा गया है। (भावानुवाद)
संबंधित
स्रोत: विष्णु पुराण; सूर्य सिद्धांत