हरिद्रा
आयुर्वेद, ज्योतिष एवं योग
अन्य नाम: हल्दी, कांति, वर्णदायिनी
हरिद्रा अर्थात हल्दी एक उष्ण वीर्य वाली औषधि है, जो रसोई और चिकित्सा — दोनों में प्रयुक्त होती है। इसे वर्णदायिनी और कांति के लिए प्रसिद्ध माना जाता है। इसका वानस्पतिक नाम कुरकुमा लोंगा है।
चरक संहिता और सुश्रुत संहिता में हरिद्रा को कटु-तिक्त रस, उष्ण वीर्य, कफ-पित्त शामक और व्रणरोपक बताया गया है। यह कुष्ठ, प्रमेह और त्वचा-रोगों में उपयोगी है।
हरिद्रा शरीर की शुद्धि करती, रक्त-विकार दूर करती और घाव भरने में सहायक है। इसका प्रयोग चूर्ण, क्वाथ, लेप और तैल के रूप में होता है।
प्रसिद्ध कथन
(भावानुवाद) हरिद्रा कफ और पित्त को शांत करती तथा त्वचा को वर्ण और कांति देती है।
संबंधित
स्रोत: सुश्रुत संहिता, चरक संहिता