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घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

मंदिर, ज्योतिर्लिंग एवं शक्तिपीठ

अन्य नाम: घृष्णेश्वर, घुश्मेश्वर, घुसृणेश्वर, वेरूल

ज्योतिर्लिंगशिवद्वादश ज्योतिर्लिंगमंदिरतीर्थमहाराष्ट्र

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) जिले में एलोरा गुफाओं के निकट वेरूल गाँव में विराजमान है। इसे घुश्मेश्वर या घुसृणेश्वर भी कहा जाता है। यह द्वादश ज्योतिर्लिंगों में अंतिम तथा आकार में सबसे छोटा माना जाता है।

यहाँ शिव घृष्णेश्वर रूप में पूजित हैं। मान्यता है कि यहाँ दर्शन से संतान-सुख तथा वंश-वृद्धि होती है। वर्तमान मंदिर का पुनर्निर्माण अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था।

कथा के अनुसार शिव-भक्त घुश्मा प्रतिदिन शिवलिंग बनाकर पूजा करती थी और उसे सरोवर में विसर्जित करती थी। उसकी सौतेली बहन ने ईर्ष्यावश उसके पुत्र की हत्या कर दी, फिर भी घुश्मा ने विचलित हुए बिना पूजा जारी रखी। शिव प्रसन्न हुए और उसके पुत्र को पुनर्जीवित किया तथा उसके निवेदन पर वहीं 'घुश्मेश्वर' रूप में स्थिर हुए। यह द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा का अंतिम स्थान माना जाता है।

प्रसिद्ध कथन

घुश्मेशं च शिवालये॥ (द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्)
(भावानुवाद) शिवालय में घुश्मेश विराजमान हैं।

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स्रोत: शिव पुराण