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कुब्जा

स्त्री-रत्न एवं विदुषियाँ

अन्य नाम: कुब्जा, त्रिवक्रा

भागवतकृष्णभक्ति

कुब्जा (त्रिवक्रा) मथुरा की एक कुबड़ी स्त्री थीं, जो कंस की दासी थी और उसके लिए सुगंधित उबटन ले जाती थीं।

भागवत पुराण के अनुसार वे कंस के महल की सेविका थीं और तीन स्थानों से टेढ़ी (त्रिवक्रा) थीं।

कृष्ण और बलराम ने जब उनसे उबटन माँगा, तो उन्होंने प्रेमपूर्वक सब दे दिया; प्रसन्न होकर कृष्ण ने अपने पैरों और अंगुलियों के स्पर्श से उनके शरीर को सीधा और सुंदर बना दिया। भागवत (दशम स्कंध) तथा ब्रह्मवैवर्त पुराण में यह प्रसंग है; भक्ति-परंपरा में यह कथा दिखाती है कि कृष्ण का अनुग्रह जाति या रूप का भेद नहीं करता।

नाते-रिश्ते

  • स्वामी: कंस
  • प्रभु: कृष्ण

पूर्वजन्म एवं प्रारब्ध

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार पूर्व जन्म में वे शूर्पणखा थीं।

प्रसिद्ध कथन

मैं त्रिवक्रा हूँ—तीन स्थानों से टेढ़ी; यह उबटन कंस के लिए ले जा रही हूँ। (श्रीमद्भागवत पुराण – भावानुवाद)

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स्रोत: श्रीमद्भागवत पुराण